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जयप्रकाश नारायण को श्रद्धांजलि : धनबाद में सम्पूर्ण क्रांति दिवस पर नेताओं ने याद किए लोकनायक के विचार

धनबाद : लोकनायक स्मारक समिति धनबाद की ओर से शुक्रवार को बैंक मोड़ स्थित जेपी चौक पर सम्पूर्ण क्रांति दिवस मनाया गया. इस अवसर पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. कार्यक्रम में शहर के कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

सभी ने लोकनायक के विचारों और उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया।

कार्यक्रम में धनबाद के मेयर संजीव सिंह, पूर्व सांसद पी.एन. सिंह, समाजसेवी विजय झा, जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह, झामुमो नेत्री नीलम मिश्रा समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे. सभी ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के चित्र और प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर मेयर संजीव सिंह ने कहा कि सम्पूर्ण क्रांति केवल एक राजनीतिक आंदोलन नहीं था बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला जनआंदोलन था. उन्होंने कहा कि देश को अंग्रेजों की गुलामी से तो आजादी मिल गई थी, लेकिन सामाजिक, राजनीतिक और मानसिक गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने सम्पूर्ण क्रांति का बिगुल फूंका था. उन्होंने लोगों को यह संदेश दिया था कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सर्वोपरि है और यदि किसी की आवाज दबाने का प्रयास किया जाए तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर अपनी बात रखी जा सकती है।

पूर्व सांसद पी.एन. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि 5 जून भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन है. इसी दिन वर्ष 1974 में पटना के गांधी मैदान से लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने सम्पूर्ण क्रांति का आह्वान किया था. उन्होंने बताया कि यह आंदोलन राजनीतिक, शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।

उन्होंने कहा कि उस दौर में राजनीतिक विकृतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता को संगठित कर देश को नई दिशा देने का प्रयास किया गया था. यही नहीं उन्होंने आपातकाल के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन के बाद देश में बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिले. उस समय हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नेताओं को जेल जाना पड़ा, लेकिन जनता का विश्वास लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व और विचारों पर अडिग बना रहा. यही कारण है कि आज भी उन्हें लोकतंत्र के सबसे बड़े प्रहरी और जननायक के रूप में याद किया जाता है।

समाजसेवी विजय झा ने कहा कि 5 जून 1974 को गांधी मैदान से दिया गया सम्पूर्ण क्रांति का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उस समय था. उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण क्रांति का उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि समाज के हर क्षेत्र- राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक में सकारात्मक बदलाव लाना था. लोकतंत्र को सशक्त बनाए रखने के लिए समय-समय पर जनजागरण और सामाजिक चेतना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि लोकशाही की ताकत ही लोकतंत्र की असली पहचान है और यही लोकनायक के विचारों का मूल आधार था।

जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जीवन त्याग, संघर्ष और जनसेवा का प्रतीक था. उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को उनके जीवन और विचारों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है. उन्होंने उपस्थित लोगों से समाज और राष्ट्रहित में कार्य करने के अलावा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आदर्शों पर चलने तथा लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और जनहित के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया. वक्ताओं ने कहा कि सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसने देश की राजनीति और समाज को नई दिशा देने का काम किया।

समारोह का समापन लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और उनके बताए मार्ग पर चलने के संकल्प के साथ हुआ. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और नागरिक उपस्थित रहे।

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Editor- Koylanchal Times News

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