
धनबाद : जिले में निजी विद्यालयों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. उपायुक्त आदित्य रंजन की अध्यक्षता में बुधवार को सभी निजी स्कूलों के साथ अहम बैठक आयोजित की गई. जिसमें वार्षिक शुल्क, डेवलपमेंट फीस, री-एडमिशन फीस, किताब और ड्रेस की खरीद जैसे मुद्दों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए।
उपायुक्त ने साफ कहा कि कोई भी निजी विद्यालय री-एडमिशन (पुनः नामांकन) के नाम पर छात्रों से फीस नहीं लेगा. साथ ही वार्षिक शुल्क 10 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकेगा. उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सभी स्कूल नॉट फॉर प्रॉफिट के सिद्धांत पर संचालित हों।
बैठक में यह भी तय किया गया कि वार्षिक शुल्क का पूरा विवरण स्कूल प्रशासन को जिला प्रशासन को उपलब्ध कराना होगा और इसे स्कूल की वेबसाइट व नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा. डेवलपमेंट फीस लेने के उद्देश्य की जानकारी भी अभिभावकों को स्पष्ट रूप से देनी होगी. अभिभावकों पर एकमुश्त शुल्क जमा करने का दबाव नहीं बनाया जाएगा. वे तिमाही आधार पर फीस जमा कर सकेंगे।
किताब-ड्रेस की बाध्यता खत्म
उपायुक्त ने स्कूल परिसरों में किताबें और ड्रेस बेचने पर सख्त रोक लगा दी. उन्होंने कहा कि स्कूल केवल किताबों और ड्रेस की सूची वेबसाइट पर प्रकाशित करेंगे. जिससे अभिभावक अपनी सुविधा अनुसार किसी भी दुकान से खरीदारी कर सकें. साथ ही 5 वर्षों से पहले स्कूल ड्रेस नहीं बदलने और प्रकाशित बुक लिस्ट में बदलाव नहीं करने का भी निर्देश दिया गया।
ऑडिट और निगरानी होगी सख्त
सभी निजी विद्यालयों को अपने पिछले एक वर्ष का ऑडिट रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट, शुल्क समिति का गठन और उसकी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया. उपायुक्त ने कहा कि साल में दो बार ऑडिट होगा और खर्च का मिलान किया जाएगा।
एक सप्ताह के भीतर निर्देशों का अनुपालन नहीं करने पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही जिला प्रशासन की पांच सदस्यीय टीम स्कूलों की औचक जांच करेगी।
BPL छात्रों के लिए 25% सीट अनिवार्य
उपायुक्त ने बीपीएल कोटा में कम नामांकन पर चिंता जताते हुए, सभी निजी स्कूलों को 25% सीटें आरक्षित रखने का निर्देश दिया।
छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
स्कूल बस और वैन चालकों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है. सभी वाहनों में सीसीटीवी और जीपीएस लगाने, स्कूल समय पर अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती तथा छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए. इसके अलावा बच्चों की मानसिक स्थिति पर नजर रखने, जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग कराने और छात्राओं के लिए विशेष व्यवस्था करने को कहा गया. स्कूलों में इको क्लब गठन पर भी जोर दिया गया।
जनप्रतिनिधियों ने भी उठाई आवाज
इससे पहले जनप्रतिनिधियों और अभिभावक संघ के साथ हुई बैठक में विधायक राज सिन्हा, अरूप चटर्जी और चंद्रदेव महतो ने स्कूलों की मनमानी, एनुअल चार्ज के नाम पर वसूली और तय दुकानों से खरीदारी की बाध्यता पर रोक लगाने की मांग की. वहीं कुछ स्कूल प्राचार्यों ने डेवलपमेंट के लिए वार्षिक शुल्क को आवश्यक बताया जिस पर प्रशासन ने संतुलित लेकिन सख्त रुख अपनाया।
बैठक में उप विकास आयुक्त सन्नी राज, डीएफओ विकास पालीवाल, डीटीओ दिवाकर द्विवेदी, डीईओ अभिषेक झा, डीएसई आयुष कुमार सहित कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि और जिले के सभी निजी विद्यालयों के प्राचार्य मौजूद रहे।