
झरिया : झरिया का ऐतिहासिक राजा तालाब रविवार की शाम ‘मिनी काशी’ के रूप में जीवंत हो उठा। बेहद खूबसूरत ढंग से सजाए गए राजा तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य के पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य गंगा आरती और भजन संध्या का साक्षी बनने के लिए पूरा झरिया शहर घाटों पर उमड़ पड़ा।
झरिया के इतिहास में पहली बार आयोजित हुए इस अलौकिक आध्यात्मिक दृश्य को निहारने के लिए दोपहर साढ़े तीन बजे से ही महिलाएं, पुरुष और बच्चे पैदल ही राजा तालाब की ओर बढ़ने लगे थे। सतरंगी रोशनी और दीपों की जगमगाहट से नहाए तालाब के घाटों पर शाम ढलते-ढलते श्रद्धालुओं की ऐसी अभूतपूर्व और ऐतिहासिक भीड़ जुटी, जिसे देख हर कोई मंत्रमुग्ध था।
इस भव्य महोत्सव का शुभारंभ आयोजक व मुख्य यजमान झरिया विधायक रागिनी सिंह और महापौर संजीव सिंह द्वारा राजा तालाब में किए गए विधिवत पूजन, अर्चन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। आरती शुरू होने से ठीक पहले आसमान सतरंगी आतिशबाजी से गूंज उठा, जिसने दर्शकों का उत्साह दोगुना कर दिया। इसके बाद काशी (बनारस) के प्रख्यात आचार्यों-रणधीर पांडेय, अमित पांडेय, गोविंद तिवारी, देवासु पाठक, श्रीकांत पांडेय, अभय तिवारी और राम सहाय उपाध्याय की सात सदस्यीय विद्वान टीम ने शंखनाद और डमरू की पावन गूंज के बीच महाआरती शुरू की।
देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में भी अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी बनारस की इस टीम ने अपनी विशेष पारंपरिक शैली से पूरे वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय कर दिया।
आरती से पूर्व सुप्रसिद्ध भजन गायक अभिषेक पांडेय और उनकी टीम ने अपनी सुमधुर प्रस्तुति से उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर झूमने पर मजबूर कर दिया। महाआरती के भव्य समापन के बाद एक बार फिर आसमान में जमकर शानदार आतिशबाजी की गई, जिससे पूरा झरिया शहर आलोकित हो उठा।
इस ऐतिहासिक धार्मिक महोत्सव में झरिया राज स्व काली प्रसाद सिंह की बड़ी बहू राजमाता सुजाता सिंह और धनबाद के पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह, जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह, निरसा की पूर्व विधायक अपर्णा सेनगुप्ता, भाजपा नेत्री तारा देवी विशेष रूप से उपस्थित हुए।
इनके अलावा जिले के सैकड़ों प्रबुद्ध नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और व्यवसाई प्रतिनिधि भी इस पावन महाआरती का पुण्य लाभ उठाने और व्यवस्था को सहयोग देने के लिए घाटों पर मौजूद रहे।
राजा तालाब की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर है राजा तालाब
झरिया के राजा स्वर्गीय जय मंगल सिंह द्वारा निर्मित यह ऐतिहासिक तालाब स्थानीय लोगों की अगाध आस्था का केंद्र है। शहर के तमाम मुख्य धार्मिक अनुष्ठान इसी तालाब के तट पर या इसके पवित्र जल से संपन्न होते हैं। सौंदर्यीकरण के बाद यहां बनारस के विद्वानों का यह भव्य आगमन झरिया वासियों के दिलों पर एक अमिट छाप छोड़ गया।
भीड़ और सुरक्षा के इंतजाम व्यवस्था थी चाक-चौबंद
महोत्सव को लेकर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। तालाब के चारों ओर स्थानीय पुलिस बल और वालंटियर्स मुस्तैद दिखे। हालांकि, उम्मीद से कई गुना ज्यादा भीड़ अचानक उमड़ पड़ने के कारण घाटों पर बैठने के इंतजाम छोटे पड़ गए और कुछ जगहों पर आंशिक अव्यवस्था की स्थिति बन गई। सबसे ज्यादा दबाव मुख्य प्रवेश द्वार पर देखा गया, जहां हर कोई भीतर प्रवेश करने के लिए बेताब था।
आयोजन पर अतिथियों की प्रतिक्रिया
यह भव्य आयोजन वास्तव में अत्यंत सराहनीय है। महापौर संजीव सिंह और विधायक रागिनी सिंह के भगीरथ प्रयास से ही यह अलौकिक दृश्य संभव हो पाया है। लंबे समय से उपेक्षित पड़े इस ऐतिहासिक तालाब का कायाकल्प देखकर आज ऐसा लग रहा है कि राजा तालाब का पुराना गौरवशाली युग वापस लौट आया है।
सुजाता सिंह, झरिया राज परिवार की बहू
यह ऐतिहासिक आयोजन पूरी तरह झरिया की देवतुल्य जनता का है। मैं बनारस व जमशेदपुर से पधारे तमाम विद्वान आचार्यों, भजन गायकों और उपस्थित विशाल जनसमूह का अभिनंदन करता हूं। राजा तालाब के इस सांस्कृतिक पुनरुत्थान और सफल महाआरती का वास्तविक श्रेय झरिया विधायक के संकल्प को जाता है।
संजीव सिंह, महापौर, नगर निगम
झरिया के लोगों के बीच ऐसा भव्य आध्यात्मिक आयोजन कराना मेरा एक पुराना सपना था, परंतु उपयुक्त स्थान के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा था। आज राजा तालाब के ऐतिहासिक सौंदर्यीकरण के साथ ही यह संकल्प साकार हुआ है। आज झरिया की इस पावन धरा पर साक्षात बनारस उतर आया है। राजा तालाब को भव्य बनाया जाएगा।